**अपनी दोस्ती***
क्या कहू मेरे लिए कौन हो तुम...
अंँधेरे में जलने वाले दीपक हो तुम,
हर दर्द का मेरे मरहम हो तुम
मेरे हर खुशी का राज़ हो तुम।।१।।
मन के लबों पर तुम्हारे
हँसी का सागर हो
वसंत ऋतू के तुम
बहार हो।।२।।
किसमे इतनी हिम्मत
जो अपनी यारी तोड़ सके,
इतनी मजबूत दोस्ती हैं
जो समय के चक्र को भी मोड़ सके।।३।।
रात में जब आँखे बंद हुई
तब यादो की बारात तुमने लायी,
फिर आंँखो में आँसू और
लबों पर हँसी छायी।४।।
बस इतना याद राखना पगलों...
तुम्हारी चुप्पी मुझे रुलये
सच कहू यारों...
तुम्हारा प्यार और पागलपंती मुझको भाये।५।
क्या कहू मेरे लिए कौन हो तुम...
अंँधेरे में जलने वाले दीपक हो तुम,
हर दर्द का मेरे मरहम हो तुम
मेरे हर खुशी का राज़ हो तुम।।१।।
मन के लबों पर तुम्हारे
हँसी का सागर हो
वसंत ऋतू के तुम
बहार हो।।२।।
किसमे इतनी हिम्मत
जो अपनी यारी तोड़ सके,
इतनी मजबूत दोस्ती हैं
जो समय के चक्र को भी मोड़ सके।।३।।
रात में जब आँखे बंद हुई
तब यादो की बारात तुमने लायी,
फिर आंँखो में आँसू और
लबों पर हँसी छायी।४।।
बस इतना याद राखना पगलों...
तुम्हारी चुप्पी मुझे रुलये
सच कहू यारों...
तुम्हारा प्यार और पागलपंती मुझको भाये।५।

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